प्रोफेसर (डॉ.) गणेश शंकर पालीवाल जी “आत्माराम पुरूस्कार” से होंगे सम्मानित!

Guruji Final

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रथम डी.एस.सी. प्रोफेसर (डॉ.) गणेश शंकर पालीवाल जी को वर्ष 2012 के सम्मानजनक “आत्माराम पुरुस्कार” से सम्मानित किया जायेगा. यह सम्मान उन्हें वैज्ञानिक और तकनीकी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए “अखिल भारतीय हिंदी सेवी सम्मान योजना” के अंतर्गत वर्ष 2012 के लिए, भारत के महामहिम राष्ट्रपति श्री प्रणव मुख़र्जी जी के कर-कमलों द्वारा 19 अप्रैल 2016 को राष्ट्रपति भवन में दिया जायेगा.

Award letter to Professor paliwal

उनके शोध कार्य के अनुभव का इसी बात से पता लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने 40 वर्ष के शोध-कार्यकाल में 06 डी.एस.सी एवं 91 पी.एच.डी/डी.फिल का निदेशन किया. इसी दौरान उन्होंने 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की एवं राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लेख/शोध पत्र भी लिखे. वे अभी भी पूर्ण तत्परता के साथ भारत सरकार द्वारा अनुग्रहीत अनेक अनुवाद कार्यों में लगे हैं.

 “स्वदेशी विज्ञान” हिंदी भाषी छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों एवं जनमानस के लिए समर्पित ई-जर्नल को इस बात की अत्यंत ख़ुशी है कि प्रोफेसर पालीवाल जी इस जर्नल के मुख्य संरक्षक के रूप में हमसे जुडे तथा हमें इस कार्य को आगे बदने के लिए प्रोत्साहित एवं प्रेरित करते रहते हैं. हम आशा करते हैं कि हमें भविष्य में भी उनका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहेगा.

Dr. Prashant Pant
डॉ. प्रशांत पंत एक शिक्षक, शोधकर्ता, एवं लेखन के रूप में दयाल सिंह महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने आणविक परिस्थितिकी एवं परिस्थितिकी तंत्र में पुनर्स्थापन में पीएचडी प्राप्त किया है. उन्हें दिल्ली हिंदी साहित्य अकादमी, दिल्ली सरकार की ओर से हिंदी छात्र प्रतिभा पुरुस्कार से सम्मानित किया गया है.उनके अन्य रूचिकर विषय वानिकी, लेग्युम फाइलोजेनी, एवं जैव-सूचना विज्ञान हैं. वर्तमान में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंतर्गत एक डिग्री कॉलेज में सहायक प्रोफ़ेसर के पद पर नियुक्त हैं. इसके अलावा वे कई अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रों तथा ऑनलाइन जर्नल “बायोइन्फरमेटिक्स रिव्यु” के मुख्य कार्यकारी संपादक के रूप में कार्यरत हैं.

2 Comments

  1. abhishek

    April 19, 2016 at 4:52 pm

    This is very good effort…. Full marks

    • Dr. Prashant Pant

      Dr. Prashant Pant

      April 19, 2016 at 5:59 pm

      Thank you Abhishek. The credit goes to our Enthusiatic team of young techies and editors who relentless put in hard work for the service of science.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *