ब्लू मॉरमॉन-महाराष्ट्र की राज्य तितली (विजेता प्रविष्टि-अगस्त 2016 मासिक प्रतियोगिता)

लेखक: बलजीत सिंह
नई दिल्ली
How does one become a Butterfly?

You must want to fly, so much, that you are willing to give up being a caterpillar.

~ Trina Paulus

महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने एक तितली, ब्लू मोरमोन (Blue Mormon) वैज्ञानिक नाम:  पपिलियो पालीम्नेस्टर (Papilio polymnestor) को जून 2015 में राज्य तितली (state butterfly) का दर्जा दिया है (चित्र 1)।यह निर्णय महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव बोर्ड द्वारा लिया गया है। महाराष्ट्र देश के अनुमानित तिततियो की जनसंख्या का लगभग 15% (225 प्रजातियां) धारित करता है। ब्लू मॉरमॉन को राजकीय पहचान दिलाने मे शिक्षाविदों, अनुसंधानकर्त्ताओं तथा प्रकृति प्रेमियों का बडा योगदान रहा है।

चित्र 1: ब्लू मॉरमॉन (साभार: By "Papilio polymnestor-Kadavoor-2016-03-30-001" © 2016 Jeevan Jose, Kerala, India is used here under a Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, CC BY-SA 4.0, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=49544109)

चित्र 1: ब्लू मॉरमॉन (साभार: By “Papilio polymnestor-Kadavoor-2016-03-30-001” © 2016 Jeevan Jose, Kerala, India is used here under a Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, CC BY-SA 4.0, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=49544109)

ब्लू मॉरमॉन पर बात करने से पूर्व तितली के बारे में एक सामान्य जानकारी ले लें। तितलियां कीट समूह से संबध रखती है। इनमे पंख, छ: जोडी संयुक्त पाद, शरीर तीन खंडो मे विभाजित ( सिर, वक्ष एंव पुच्छ), एक जोडी एण्टीने,  सँयुक्त नेत्र, तथा एक वाहृढांचा (an exo-skeleton) पाया जाता है। शरीर छोटे-छोटे संवेदी रोमों से ढका रहता है। चार पंख तथा छः जोडी पाद शरीर के वक्ष से जुडा रहता है। वक्ष क्षेत्र मे पादों तथा पंखो को चलाने हेतु  मांसपेशियां पायी जाती है। तितलियां बडी अच्छी  तरीके से उडान भर सकती है । वे अपने शरीर के तापमान के 86oC से उपर जाने के बावजूद भी उडान भर सकती है। वे शीत काल मे स्वंय को गर्म रख सकती है।

ब्लू मॉरमॉन तितलियो में आकार के अनुसार, साउदर्न बार्डविंग के बाद दूसरी बडी तितली है। इसके पंख काले मखमली तथा उन पर चमकीले नीले धब्बे पाये जाते है। पखों के निचले हिस्से श्याम-श्वेत तथा शरीर के एक भाग मे लाल धब्बे भी पाये जाते है। भारत मे इनका वितरण महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट, तटीय क्षेत्रों तथा पडोसी देश श्रीलंका मे भी पाया जाता है।

नर ब्लू मॉरमॉन में पंख घने काले मखमली होते है। मादायें नरों के समान होती है लेकिन उनके अग्रपंखों मे अन्तर-नाडी (inter-nervular streaks) धारियों के कारण ये पंख हल्के रंग के प्रतीत होते है तथा इनका विस्तार उपरी से निचले भागो तक हो जाता है। (चित्र 2)

चित्र 2: मादा ब्लू मॉरमॉन (साभार: By "Papilio polymnestor-Kadavoor-2016-03-30-001" © 2016 Jeevan Jose, Kerala, India is used here under a Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, CC BY-SA 4.0, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=49544109)

चित्र 2: मादा ब्लू मॉरमॉन (साभार: By “Papilio polymnestor-Kadavoor-2016-03-30-001” © 2016 Jeevan Jose, Kerala, India is used here under a Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, CC BY-SA 4.0, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=49544109)

ब्लू मॉरमॉन को बगीचों के अलावा मुम्बई, पुणे, तथा बैगलोर जैसे व्यस्त शहरो के बीच देखा जाता है। इस प्रचुरता के  कारण यह एक सामान्य वितरित तितली प्रजाति है। यद्यापि इसकी उपस्थिति वर्ष भर देखी जाती है लेकिन वर्षाकाल तथा उसके बाद इनकी संख्या मे वृद्धि हो जाती है। ब्लू मॉरमॉन सदाबहार वनों मे जहां उच्च वर्षा होती है वहां सर्वाधिक पायी जाती है, इनके अलावा, उपोष्ण वनों, वृक्षयुक्त शहरी क्षेत्र में भी पाये जाते है, जहाँ इन तितलियो के होस्ट (Host) पादपों को उगाया जाता है। ब्लू मॉरमॉन के मुख्य होस्ट पादप रूटेसी (Rutaceae) फैमिली से सम्बंधित है जैसे: अत्लान्टिया रेसेमोसा (Atlantia racemosa), अत्लान्टिया व्हितीआइ (A. wightii), ग्लैकोस्मिस अर्बोरेया (Glycosmis arborea), परामिग्य्ना मोनोफ्य्ल्ला (Paramigyna monophylla), सिटरस ग्रान्दिस (Citrus grandis), सिटरस लिमोन (Citrus limon) और दुसरे  Citrus प्रजाति के सदस्य.

नर ब्लू मॉरमॉन प्रकाशानुुरागी (sun loving) तथा छायाविरागी होता है। यह एक दिशीय तीव्र उडान को दर्शाता है तथा अक्सर अपने उडान के मार्ग को परिवार्तित करता रहता है जिससे इसको पकडना दुष्कर कार्य होता है। ब्लू मारमान धूप भी सेंकते पाए जाते है।

मादा ब्लू मॉरमॉन भूस्थल से लगभग 10 फुट ऊपर पत्तियो के उपरी सतह पर अंडे देते है। इन अंडो का आकार गोल तथा हल्का हरा रंग का होता है लेकिन धीरे-2 इनका रंग गहराता जाता है तथा परिपक्व अड़े नांरगी-पीला रंग ले लेते है। नवजात इल्ली (newborn caterpillar) सर्वप्रथम अपने अंडकवच को ही अपना भोजन बनाता है तदुपरांत पत्ती के किनारे पर स्वानिर्मित एक मखमली गद्दे पर आराम करता है। इसका छोटा आकार  इसको एक छदमावरण प्रदान करता है जिससे यह पत्ती के बीच मे आराम कर किनारे के भाग मे चारण करता रहता है।

जैसे -2 ब्लू मॉरमॉन बूढे होते जाते है, उनकी पंखो की चमक धूमिल पडती जाती है। ये केवल तरल पदार्थों का भोजन के रूप मे सेवन करते है जैसे, मकरंद, जिसके निष्कर्षण हेतु इनके पास एक लम्बी, लचीली प्रौबोसिस नामक जिहवा स्वरूप एक अंग पाया जाता है। ध्यान दें, कि ब्लू मॉरमॉन का अस्तित्व पुष्प पादपों के उद्धविकास से जुडा है, इसलिए इनके संरक्षण हेतु पादप एंव प्रकृति का संरक्षण अनिवार्य हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिया गया यह कदम अत्यंत सराहनीय है क्योंकि इससे जीव विज्ञानियों, तितली शोधकर्ताओं में, संरक्षण में लगे गैर-सरकारी संस्थाओं में, उत्साह का संचार होता है, और सामान्य जनों में शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जागृत होने में सहायता मिलती है। आने वाले समय में इस प्रकार के अत्यंत सराहनीय कदम अन्य राज्यों में भी लिए जायें जिससे इसके सामाजिक-पारिस्थितिक-शैक्षिक-आर्थिक फायदे प्रकृति, पर्यावरण व लोगों को मिल सकें।

Binny

Wildlife and Nature Lover

2 Comments

  1. Dr Arun K Maurya

    September 13, 2016 at 6:44 pm

    many congratulation to Baljeet singh & keep writing for swadeshi vigyan !

    • Binny

      Binny

      September 14, 2016 at 5:03 pm

      Thank You so much ..

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