ब्रसीनोस्टीरोइड्स: एक पादप स्टेरॉयड हॉर्मोन (भाग 2)

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धृति कपूर, अमनदीप रत्तन, रेनू भारद्वाज

                                 वनस्पति एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर, पंजाब
Corresponding Author: डॉ. धृति कपूर (ई-मेल: [email protected])
अनुवाद एवं संपादन: मुनिबा फायज़ा, डॉ. प्रशांत पंत, एवं डॉ. अरुण कुमार मौर्य
Citation: कपूर, डी., 2016. ब्रसीनोस्टीरोइड्स: एक पादप स्टेरॉयड हॉर्मोन (भाग 2). स्वदेशी विज्ञान, 1(3) (जून).
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परिचय

ब्रसीनोस्टीरोइड्स पर पिछले आलेख  “ब्रसीनोस्टीरोइड्स: एक पादप स्टेरॉयड हॉर्मोन (भाग 1)” में कपूर एवं सहयोगी, 2016 द्वारा इस पादप स्टेरॉयड हॉर्मोन की खोज, संरचना व वितरण पर प्रकाश डाला गया था[1-7]. इसी क्रम में यह आलेख इस पादप हॉर्मोन के शारीरिक कार्य (physiological functions), प्रतिबल प्रबंधन, अन्य पादप होर्मोनेस के साथ इनका अंतराकर्षण व भविष्य में इस पादप हॉर्मोन के उपयोग की संभावनाएं पर चर्चा की जाएगी.  ब्रसीनोस्टीरोइड्स का महत्वपूर्ण प्रभाव शरीर और प्रजनन विकास, बीज अंकुरण और तनाव सहिष्णुता पर पड़ता है[8,9,10] | ज़ू महोदय (2006) के अनुसार, यह पादप हार्मोन औक्सिन परिवहन (Auxin Transport) को प्रोत्साहित करते हैं और इस प्रकार पादपानुर्वतन (Plant tropism) को नियंत्रित रखता है। यह पौधों की वृद्धि और विकास को बढ़ावा देने के साथ, फलों की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं तथा फसल की उपज को बढ़ाते हैं| कोशिकीय स्तर पर, ब्रसीनोस्टीरोइड्स प्रोटीन और न्यूक्लिक एसिड के संश्लेषण को सक्रिय करते हैं, कोशिका झिल्ली की पारगम्यता और कोशिका की दीवार के यांत्रिक गुणों को भी परिवर्तित करते हैं। इसके अतिरिक्त संश्लेषक क्षमता को भी बढ़ावा देते हैं तथा कोशिका वृद्धि और विभाजन में सहायता करते हैं[6,12]। ब्रसीनोस्टीरोइड्स की विभिन्न शारीरिकी प्रभाव निम्नलिखित हैं :-

(क) कोशिका विभाजन और कोशिका विस्तार

ब्रसीनोस्टीरोइड्स नैनोमोलर सांद्रता (concentration) पर कोशिका विभाजन को बढ़ावा देते हैं| क्लाउज़ और सेस्से (1998) के अनुसार, ब्रसीनोस्टीरोइड्स कोशिका विभाजन और वृद्धि प्रक्रियाओं के द्वारा पौधों के विकास को प्रोत्साहित करते हैं। क्लाउज़ (1996) और  मंडवा (1988) ने यह विवरण दिया था कि ब्रसीनोस्टीरोइड्स, द्धिबीजपत्री के एपीकोटाइल्स, हाईपोकोटाइल्स और कोलिओपटाईल्स के डंठल तथा मोनोकोट्स के मीज़ोकोटाइल को बढ़ावा देते हैं। एराबिडापसिस थालीआना (Arabidopsis thaliana) में, 28- होमोब्रस्सिनोलाईडस और 28-होमोकैसटे , प्लाज्मा झिल्ली अति ध्रुवीकरण (हाईपरपोलेराईजेशन) के माध्यम से निलंबन कोशिकाओं का विस्तार करते हैं [15] | अजूकी सेम एपीकोटाईल और मक्का की जड़ों में, ब्रसीनोस्टीरोइड्स, एटीपेज (ATPase) के वर्धन क्रिया को बढ़ाते हैं, जिसकी वजह से प्रोटोन (H+) बाहर निकलता है और कोशिका की दीवार की शिथिलता को उत्तेजित करता है [16] | आक्सिंस और साइटोकाईनिंस की उपस्थिती में ब्रसीनोस्टीरोइड्स कोशिका विभाजन को 50 % तक प्रेरित करते हैं, यदि इनको नैनोमोलर सारकृत द्रब्य में रखा जाये [17] | उसी प्रकार, आक्सिंस और साइटोकाईनिंस की उपस्थिति में ब्रसीनोस्टीरोइड्स से, चीनी बंदगोभी और पिटुनिया के प्रोटोप्लास्ट (Petunia protoplasts) में कोशिका विभाजन को प्रेरित किया गया था [18] | होमोब्रस्सिनोलाईडस को औक्सिन (auxin) के साथ प्रयोग करने पर केले (जिसको इन विट्रो स्थितियों में संवर्धित किया हो) के शिखर मेरिस्टेम मे व्रद्धि करता है।

(ख) साईटोडिफ़ेरेन्शिएशन (Cytodifferentiation)

क्लाउज़ और सेस्से (1998) ने यह प्रतिपादित किया था कि संवहनी विभदीकरण (vascular differentiation) में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करते हैं। ब्रसीनोस्टीरोइड्स की नैनोमोलर  सांद्रता, विभेदीकरण की दर को 10 गुणा बढा देते हैं [17] | ब्रसीनोस्टीरोइड्स अपने जैवसंश्लेषण पर स्वयं काबू करते हैं| नगाटा एवं सहयोगी (2001) के अनुसार, लेपीड्म  सेटाइवम (Lepidum sativum) में माध्यमिक जाइलम के विकास का अवरोध ब्रसीनोस्टीरोइड्स के अनुप्रयोग से वर्धित किया गया था। ज्यूरेक एवं सहयोगी (1994) ने यह सूचित किया कि ब्रसीनोस्टीरोइड्स BRU1 जीन की अभिव्यक्ति को विनियमित करते हैं, जो जाइलोग्लूकन एंड़ोट्रांसग्लाईकोसाईंलेज (xyloglucan endotransglycosylase) को कोड करता है| यह एंजाइम कोशिका भित्ति के परिवर्तन, विस्तार, फलों के पकने तथा संवहनीय विभेदीकरण मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है[22]| युनिकज़ोल (जिब्रेलिंस का मंदक) जीनिया एलीगेंस (Zinnia elegans) की पर्णमध्यक कोशिकाओं (mesophyll cells) के विभेदीकरण को निस्र्द्ध करता है और ब्रसीनोस्टीरोइड्स इस निरुद्धन पर काबू पाने में सहायता करते हैं [23] | ब्रसीनोस्टीरोइड्स, जीनिया पादप के कोशा झिल्ली (membrane) में प्रतिलेखन कारक (transcription factors) को सकारात्मक विनियमित (positively regulated) करता है [24]| पाइनस सिल्वेस्ट्रिस (Pinus silvestris) के कैम्बियम क्षेत्र से जब ब्रसीनोस्टीरोइड्स को अलग किआ गया तो वैस्कुलर डीफ़ेरेन्शिअशन में इनकी मुख्य भूमिका का ज्ञान हुआ [25]।

(ग) कायिक और प्रजनन व्रद्धि (Vegetative and Reproductive Growth)

ब्रसीनोस्टीरोइड्स का बहिर्जात (exogenous) अनुप्रयोग पौधों के विकास में मुख्य भूमिका निर्वाह करता है| गेहूं के बीजों (जिनका पहले से ही होमोब्र्सीनोलाइड के साथ उपचार किया गया) का निरीक्षण करने से यह ज्ञात हुआ कि पत्तियों की संख्या प्रति पौध वृद्धि, ताजा और सूखी वज़न वृद्धि, तथा नाईट्रेट रिडक्टेज और कार्बोनिक एन्हाईडरेज़ (nitrate reductase and carbonic anhydrase) की गतिविधियों में भी वृद्धि हुई [26]। ब्रसीनोस्टीरोइड्स के अनुप्रयोग की अवधि का प्रभाव पौधों के विकास पर पड़ता है। फूजी और साका ने 2001 [27] में यह सूचित किया था की चावल की पौध में ब्रसीनोस्टीरोइड्स से उपचार करने पर इसके तने की लम्बाई बीज अंकुरण  के पहले और सातवे दिन के बाद बढ़ गयी लेकिन तीसरे और चौथे दिन कोई बदलाव नहीं आया। ऐराबिडापसिस (Arabidopsis) के जंगली प्रकार के पौधे में 24–एपिकास्टइस्टीरोन (24-epicastasterone) और इबीएल् (EBL), जड़ की लम्बाई को 50% तक वृद्धि करते हैं। ब्रसीनोस्टीरोइड्स, एराबिडापसिस (Arabidopsis) की जड़ के विकास को बढ़ावा देते हैं, जिसमें आक्सिन और जिब्रेलिन का कोई प्रभाव नहीं होता है [28]। ब्रसीनोस्टीरोइड्स के दो अनुरूप, BB-6 और BB-16, ओपुंशिया (Opuntia), फाइकस (Ficus indica) में 0.00001 से 10 मिग्रा प्रति लीटर् (mg/L) पाए गये हैं| यह अनुरूप क्षेत्र के अंतर्गत कायिक कलियों तथा हरित गृह की स्थितियों को प्रेरित करते हैं, जिस कारण कटे क्लैडोड (cladodes) की संख्या और कुल कटे ताज़े वज़न की वृद्धि करने में सहायता करता है। कायिक कलियों के प्रारंभिक विकास के दौरान, यह अनुरूप अकालपक्‍वता और त्वरित विकास को उत्तेजित करते हैं [29] | 24-इ बी एल और  28- होमोब्रस्सिनोलाईडस जड़ को जमाने तथा कोलीअस (Plectranthus forskohlil wild.Briq.) के तने की क़ल्मों के प्रारंभिक कायिक विकास को प्रोत्साहित करने में सहायता करते हैं [30] | पाइसम सटाइवम (Pisum sativum) की पौध में, ब्रसीनोस्टीरोइड्स जड़ों की गुरूत्वानुर्वतन (gravitropic) प्रतिक्रिया को आरंभ करते हैं [31]। हयात एवं सहयोगी (2007) ने यह अध्ययन किया कि होमोब्रस्सिनोलाईडस ने ब्रैसिका जनसिया (Brassica juncea) के पौधों में उपज, कार्बोनिक एन्हाइडरेज़ (anhydrase) की गतिविधि तथा शुद्ध प्रकाशसंश्लेषक दर (net photosynthetic rate) बढ़ाया। चावल की पत्तियों के कोश (leaf sheaths) को  प्रकाश की परिस्तिथियों में उगाया तो यह ज्ञात हुआ की ब्रस्सिनोलाईडस से पत्तियों के कोश की लंबाई में वृद्धि हुई। बीजों का अँधेरे में पूर्व उपचार करने से यह देखा गया की ब्रस्सिनोलाईडस मीसोकोटाइल को बढा देते हैं, लेकिन उच्च सांद्रता (higher concentrations) होने पर निरोधात्मक प्रभाव डालते हैं [33]। कुकुमिस सटाइवस (Cucumis sativus L.) में ग्रीन हाउस की स्थितियों के दौरान, इ बी एल शुद्ध CO2 आत्मसात दर (net CO2 assimilation rate) रुबिस्को कार्बाक्शलेशन (Rubisco carboxylation) की अधिकतम दर के साथ और आर यू बी पी (RuBP) के  उत्पादन को बढ़ाने में सबसे प्रभावी रहे हैं। नियंत्रण की तुलना में, इ बी एल  से उपचार करने से पत्तियों में PSII इलेक्ट्रॉन परिवहन (PSII electron transport) की उच्च क्वांटम उत्पादकता देखी गयी तथा रुबिस्को, सूक्रोज की गतिविधियों, घुलनशील शर्करा और स्टार्च सामग्री का संवर्धन भी पाया गया [12] | ब्रसीनोस्टीरोइड्स के अनुप्रयोग से, जड़ों में ऊर्ध्ववर्धी आक्सिन (Acropetal औक्सिन) परिवहन की प्रेरण द्वारा पार्श्वमूलों में (lateral root) शीघ्र विकास हुआ।

ब्रसीनोस्टीरोइड्स पौधों में निषेचन को बढ़ावा देते हैं| ज़ेकेरीज़ एवं सहयोगी (1996) ने यह सूचित किया था कि ब्रसीनोस्टीरोइड्स परागनलिकाओं (pollen tubes) के वृद्धि को प्रेरित करते हैं और इस प्रकार निषेचन को बढ़ावा देते हैं| ब्रसीनोस्टीरोइड्स विभिन्न पौधों के पुष्पन को प्रभावित करते हैं। परागकण विकास के दौरान, संयुग्मित टेस्टीरोन (conjugated teasterone) का स्तर गिर गया और ब्रसीनोस्टीरोइड्स का स्तर बढ़ गया [36]। अंगूरों (Vitis vinifera) में, ब्रसीनोस्टीरोइड्स शरद ऋतु में लागू करने से फूलों की संख्या बढ़ गयी, परंतु जब अधिक सर्दियों में छिड़काव किया गया तो फूलों की संख्या घट गयी [34] | एराबिडापसिस (Arabidopsis) और ब्रैसिका (Brassica juncea) का ब्रसीनोस्टीरोइड्स से उपचार करने पर अगुणित (haploid) बीज पैदा होते हैं [37]।

(घ) बीज अंकुरण और फल पकना

यूकेलिप्टस कैमेलडेन्सिसे, ब्रसिका जनसिया, ट्रिडीकम एश्टीवम, अरेकिस हाइपोजिआ, लडीडियम सटाइबस, ओराइजा सटाइवा, लाइकोपरसिकम (Eucalyptus camaldulensis, Brassica juncea, Triticum aestivum, Arachis hypogea, Ladidium sativus, Oryza sativa, Lycopersicon esculentum) में ब्रसीनोस्टीरोइड्स का प्रयोग करने से बीज अंकुरण मे वृद्धि होती है [3, 38] | होमोब्रसीनोलाइडस (10 -8 M) के बहिरजात अनुप्रयोग से  चना (Cicer arientinum) के बीजों में प्रतिशत अंकुरण बढ़ जाता है [39]। गेहूं में होमोब्रसीनोलाइडस की 10 -10 M और 10 -8 M सांद्रता प्रतिशत अंकुरण को बढ़ाने में सबसे प्रभावी है [40] | जब गेहूं के बीजों को होमोब्रसीनोलाइडस में 8 घंटे के लिए पूर्वउपचारित किया गया, तो अल्फा-अमाइलेज़, केटेलेज़, पेरोक्सिडेज़, प्रोटीन्स और घुलनशील शर्करा की सक्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई| एराबिडापसिस (Arabidopsis) के पौधों में इ बी एल से उपचार करने पर बीज अंकुरण प्रोत्साहित होता है| इन पौधों में एबसिसिक एसिड (ABA) प्रेरित निष्क्रयता को अंतर्जात ब्रसीनोस्टीरोइड्स और जिब्रेलिक एसिड अभिभूत करते हैं [41]। टमाटर के फल चक्र में, EBL और होमोब्रसीनोलाइडस से उपचारित करने पर फलों का पकना सुनिशिच्त किया गया था [42] | ब्रसीनोस्टीरोइड्स से उपचारित करने के कारण, लाइकोपीन के स्तर में वृद्धि होती है और क्लोरोफिल का स्तर कम हो जाता है| इस विषय में, ब्रसीनोस्टीरोइड्स द्वारा फलों की परिपक्वता एथिलीन के गठन में उत्तेजना होने के साथ जुड़ी हुई है। खीरे में प्रारंभिक फल विकास भी ब्रसीनोस्टीरोइड्स पदोन्नत करते हैं [43] | अंगूर (Vitis vinifera) के फलों के पकने में ब्रसीनोस्टीरोइड्स ने मुख्य भूमिका निभाई। इस पौधे में, ब्रसीनोस्टीरोइड्स के वर्धित अंतर्जात स्तरों ने फल परिपक्वता को बढ़ावा दिया [44] | चावल में, फूलों के पकने से पहले और पकने के दौरान ब्रसीनोलाइडस से उपचार करने पर फल परिपक्वता तथा छिलके वाले अनाज में स्टार्च सामग्री उपस्थित हो गई [27]।

(ड) जीर्णन (Senescence)

ब्रसीनोस्टीरोइड्स जीर्णन को विनियमित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं| ऐंटीआक्सिडेटिव एंजाइम (CAT, SOD, और POD) की गतिविधियों को प्रभावित करके तथा मैलेनोडाईएलडीहाइड (MDA) के स्तर को बढ़ाकर ब्रसीनोस्टीरोइड्स जीर्णन की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। ली एवं सहयोगी (1996) ने ब्रसीनोस्टीरोइड्स-रहित Arabidopsis म्यूटेंट में ब्रसीनोस्टीरोइड्स की जीर्णन में कार्यात्मकता का अध्ययन किया था। मूली की पौध को कैडमियम (Cd) प्रतिबल से उपचारित कराने पर ऑक्सीकरण न्यूनीकरण (oxidative reduction) और मलिनोडाईएलडीहाइड (MDA) का स्तर घट गये तथा  इबीएल (EBL) और होमोब्रसीनोलाइडस की झिल्ली सुरक्षात्मक क्रिया (membrane protectant action) के कारण जीर्णन भी देरी से हुआ [46] | गेहूं की पत्तियों में इबीएल की उच्च सांद्रता पर उपचार करने पर जीर्णन वर्धित होता है [47] | रूमेक्स, जैन्थियम (Rumex explants, Xanthium) और मूंग अंकुर की पत्तियों में ब्रसीनोस्टीरोइड्स साइटोकाइनिन के साथ जुडकर जीर्णन को उत्प्रेरित करते हैं [48] |

(च) ब्रसीनोस्टीरोइड्स एवं प्रतिबल प्रबंधन

पादप सुरक्षा प्रणाली के समुचित रूप से कार्य करने के लिए ब्रसीनोस्टीरोइड्स की आवश्यकता होती है जो की भिन्न प्रकार के प्रतिबलों के विरुद्ध कार्य करते हैं| ब्रसीनोस्टीरोइड्स प्रतिआक्सीकारक एंजाइम (CAT, SOD, POD, GR, GPOX) और प्रतिआक्सीकारक पदार्थों (antioxidants) की सक्रिय्ता को विनियमित करते हैं तथा विभिन्न पर्यावरण प्रतिबल से पौधों की रक्षा भी करते हैं [49, 50, 32]।

ब्रसीनोस्टीरोइड्स द्वारा जैव प्रतिबल प्रबंधन

स्वज्य्नोवा एवं सहयोगियों (2006) ने ब्रसीनोस्टीरोइड्स की कैंसर विरोधी विशेषता के बारे में बताया था। मालिकोवा एवं सहयोगियों (2008) ने 28-होमोकास्टइस्टेरोने और इबीएल की कैंसर विरोधी तथा प्रजनन-शील विरोधी विशेषताओं के बारे में सूचित किया था। यह विश्लेषण किया गया था कि होर्मोन्स व्यवहार्यता, प्रजनन-शीलता तथा संवेदनशील/असंवेदनशील (एमसीएफ-7/MDA- MB-468) स्तन व् प्रोस्टेट कैंसर की कोशिका लाइनों (LN cap/ DU-145) को प्रभावित करते हैं| फ्रनेक एवं सहयोगियों (2003) ने अध्ययन किया की माउस हाइब्रिडोमा का विकास और उत्पादन इबीएल की सबनैनोमोलर सांद्रता पर हुआ। ब्रसीनोस्टीरोइड्स को तंबाकू के पौधों में कवक रोगज़नक़ ओडियम (Odium) प्रजातियों (fungal pathogen) के विरुद्ध अनुप्रयोग करने पर संक्रमण कम हो गया और पौधों में श्रेष्ठतर विकास देखा गया [54] | ब्रसीनोस्टीरोइड्स पौधों में कवक रोगज़नक़ के विरुद्ध प्रतिरोध बढ़ा देते हैं [6]। आलू के पौधों पर ब्रसीनोस्टीरोइड्स का अनुप्रयोग पर फाइटोफ्थोरा संक्रमण का प्रभाव कम हो गया [55]। ब्रसीनोस्टीरोइड्स में विषाणु संक्रमण के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान की योग्यता भी पाई जाती है [56] | तंबाकू के पौधों में तंबाकू मोज़ेक वायरस के विरुद्ध ब्रसीनोस्टीरोइड्स के अनुप्रयोग करने पर स्यूडोमोनास सिरिगी के संक्रमण का प्रभाव घट गया तथा पौधों में बेहतर वृद्धि देखी गई। वाश्मैन एवं सहयोगियों (2000) ने यह सूचित किया की ब्रसीनोस्टीरोइड्स और इसके व्युत्पन्न (derivatives)  कोशिका संर्वधन में एडीनोवायरस  की प्रतिकृति (Replication) को रोकते हैं तथा सिंप्लेक्स वायरस टाइप 1 (HSV1) की कार्यत्मकता को कम कर देते हैं| कृत्रिम (Synthetic) ब्रसीनोस्टीरोइड्स ((22s, 23s)-3β-bromo-5α, 22, 23-trihydroxystigmastan- 6-one), वेरो सेल्स में vesicular stomatitis वायरस (VSV) की प्रतिकृतिकरण को धीमा कर देते हैं [58] | इबीएल एटीजिनोटाक्सिक गतिविधियों को दिखाने के लिए सूचित किया गया था। इसको बेल (Aegle marmelos) की पत्तियों से अलग किया गया था और इसकी एंटीजिनोटाक्सिक गतिविधियों का पता सोंधी एवं सहयोगियों (2008) ने लगाया था| मिलैडोगाइन (Meloidogyne incognita) (root knot nematodes) में ब्रसीनोलाइडस का अनुप्रयोग करने से नियंत्रण की तुलना में अंडे सेने की प्रतिशत दर बढ़ गयी। मिलैडोगाईन (M. incognita) की प्रतिरक्षा प्रणाली ब्रसीनोस्टीरोइड्स के उपचार से उत्तेजित होती है [60, 61] |

ब्रसीनोस्टीरोइड्स से अजैविक प्रतिबल प्रबंधन

ब्रसीनोस्टीरोइड्स विभिन्न प्रकार के प्रतिबलों जैसे लवणता, तापमान, सूखा, कीटनाशकों, भारी धातुओं आदि के लिए सहनशीलता प्रदान करते हैं [62] | सरसों (Brassica napus) की पौध पर ऊष्मा प्रतिबल में 24-इबीएल का उपचार करने से हीट शाक प्रोटीन्स (Heat Shock Proteins; HSP) संचित (accumulate) हो जाते हैं, जिससे उष्मा प्रतिबल के प्रति सहिष्णुता बढ़ जाती है [63]। इसी प्रकार, एराबिडापसिस (A. thaliana) की पौध में केगेल एवं सहयोगियों (2007) ने यह प्रमाणित किया कि इबीएल के अनुप्रयोग से  मक्का (Zea mays) की पत्तियों में 43oC पर तापमान सहिष्णुता (Tolerance) को प्रेरित करता है| गेहूं की पत्तियों में प्रोटीन संश्लेषण को 43oC तापमान पर संतुलित किया गया और उसी प्रकार दुसरे पौधों में 23oC तापमान पर संतुलित किया गया| नियंत्रण की तुलना में, टमाटर के पौधे जिनका EBL से उपचार किया गया था, वह पौधे उष्मा प्रतिबल में अधिक सहिष्णु पाए गये [65] | हुआंग एवं सहयोगियों (2006) ने यह रिपोर्ट किया कि कम वृद्धि वाले मूंग एपिकोटाइलस शीत प्रतिबल में इबीएल की सहायता से फिर से विकसित होने लगे| सरसों (B. napus) और एराबिडापसिस (A. thaliana) की पौधों में इबीएल शीत प्रतिबल के विरुद्ध ठंड उत्तरदायी जीनों की अभिव्यक्ति में फेरबदल करके सहिष्णुता को बढ़ा देता है [64]। जब निलंबन संवर्धित कोशिकाओं को शीत प्रतिबल से उपचारित कराया गया तो, नियंत्रण पौध की तुलना में, इबीआर से उपचार किये गये कोशिका की जीवन व्यवहार्यता (viability) बढ़ गयी| प्रतिआक्सीकारक एंजाइमस जैसे APX, POD, SOD और CAT की क्रियाओं में वृद्धि पाई गयी| ऐसा पाया गया है कि इबीएल के उपचार से एस्कोर्बिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जबकि ग्लुटाथाइओन स्तर कम हो जाता है [67]।

कई विवरणों में यह देखा गया है कि ब्रसीनोस्टीरोइड्स पौधों में होने वाले लवणता प्रतिबल पर भी काबू पाने में सक्रिय रहते हैं| होमोब्रसीनोलाइडस मक्का (Zea mays) की पौध में होने वाले लवण प्रतिबल के विरुद्ध सहनशीलता बढ़ाते हैं [49]| मक्का की पौध को होमोब्रसीनोलाइडस के साथ पूर्व उपचारित करने पर SOD, CAT, APOX, GR और POD जैसे एंजाइम की सक्रियता बढ़ जाती हैं, जबकि लिपिड पेरोक्सिडेशन कम हो जाता है। गेहूं के रंगद्रव्य स्तरों को सुधरने तथा नाइट्रेट रिडक्टेस की गतिविधियों को बढ़ाने में ब्रसीनोस्टीरोइड्स मुख्य भूमिका निभाते हैं, इसलिए लवणता प्रतिबल पर भी काबू पाने में सक्रिय रहते हैं [68] | सरसों (B. juncea) के बीजों का होमोब्रसीनोलाइडस के साथ पूर्व उपचार करने से क्लोरोफिल सामग्री बढ़ जाती है, तथा नाइट्रेट रिडक्टेस और कार्बोनिक एनहाइड्रेज़ की गतिवाधियों में भी बढत होती है [32] । लवण प्रतिबल के अधीन,  यूकेलिप्टस (Eucalyptus camaldulensis) के पौधों पर इबीएल का अनुप्रयोग करने से उनके विकास में वृद्धि देखी गयी [69]| लवणीय स्थितियों में, 24-इबीएल के उपचार से चावल की पौधों का विकास जल्दी हुआ [70] | मेडिकागो (Medicago sativa) में लवणता प्रतिबल के उच्च स्तर पर ब्रसीनोस्टीरोइड्स ने प्रतिशत अंकुरण तथा पौधों के विकास को बढावा दिया [71]। सरसों (B. napus) के बीजों पर इबीएल (1 या 2 µM) के आवेदन से लवण प्रतिबल के निरोधात्मक प्रभावों पर काबू पाया गया था [64]। यह उपचार करने से बीज अंकुरण तथा सरसों (B. napus) के पौधों के विकास में बढत देखी गयी| चावल के पौधों में 24- इबीएल और 28- होमोब्रसीनोलाइडस से उपचार करने पर शुष्कता (Dryness) की सहिष्णुता संशोधित हो गई। ब्रसीनोस्टीरोइड्स के अनुप्रयोग से मल्नोडाईएलडीहाइड (MDA) का स्तर और H2O2 उत्पादन घट गया, शुद्ध CO2 आत्मसात, झिल्ली की विशेषताएँ तथा मुक्त प्रोलीन, घुलनशील फ़ीनोलिक्स और एंथोसयानिंस का उत्पादन हुआ| इबीएलअधिक कुशल साबित हुआ [72]। शुष्क व् साधारण परिस्तिथियों में, वसंत गेहूं की विभिन्न किस्मों में इबीएल से उपचार करने पर पत्तियों में पानी की सामग्री बहुत अधिक पाई गयी  [73]। कैडमियम (Cd) से उपचार किये गये मूली (Raphanus sativus) में ब्रसीनोस्टीरोइड्स के अनुप्रयोग से ताज़ा व् सूखा वज़न, प्रतिशत अंकुरण तथा पौधों की लम्बाई बढ़ गयी| इनके अनुप्रयोग से ऐंटीओक्सिडेटिव एंजाइम जैसे SOD, GPX, CAT और APOX की गतिविधियां भी उत्प्रेरित हो गई|  सरसों (B. juncea) के पौधों का कैडमियम से उपचार करने पर उनका विकास, शुद्ध संश्लेषक दर, क्लोरोफिल पिगमेंट और कार्बोनिक एनहाइड्रेज़ के स्तर बहुत कम पाए गये [74]। प्रतिबल पौधों में धातु द्वारा उत्त्पन्न होने वाले प्रभावों को होमोब्रसीनोलाइडस के अनुप्रयोग से सुधार आया [75]। भारद्वाज एवं सहयोगियों (2007) ने यह सूचित किया था कि मक्का (Zea mays) की पौधों पर 28- होमोब्रसीनोलाइडस से उपचार करने से उसके विकास और एंटीओक्सिडेटिव एंजाइमस की गतिविधियों में वृद्धि हुई तथा लिपिड पेरोक्सिडेशन कम हो गया, जिसके कारण उसकी पौधों पर होने वाले निकिल धातु के प्रतिबल पर काबू पाने में सहायता मिली। सरसों (B. juncea) की 7 दिन पुराने पौधों को  28- होमोब्रसीनोलाइडस से उपचार करने से जिंक धातु का ऊपर आना तथा जैवसांद्रता कारक (bioconcentration factor) घट गये| 28- होमोब्रसीनोलाइडस के पूर्व उपचार से धातु को सोखने की क्षमता घट गयी और एंटीओक्सिडेटिव एंजाइम की गतिविधियां अथवा प्रोटीन सामग्री बढ़ गयी [38] | शर्मा और भारद्वाज (2007) ने सरसों (B. juncea) के बीजों को 8 घंटों के लिए इबीएल की भिन्न सांद्रताओं (0, 10-7 , 10-9 , 10-11 M) में अथवा विभिन्न भारी धातुओं (Mn, Ni, Co and Zn) का अन्य सांद्रताओं (0, 25, 50 and 100 mgL -1 ) पर उपचार करके इबीएल के प्रभावों का अध्ययन किया था। इबीएल का अनुप्रयोग धातु से उपचार किऐ गसे पौधों का विकास को बढा देता है| इबीएल का 10-9 और 10-11 M सांद्र भारी धातुओं के उद्धान और संग्रह को रोकने में अधिक प्रभावी है| Cd से उपचार किये गये सरसों के पौधों में इबीएल के अनुप्रयोग से बीजपत्र (cotyledons) में धातु का संग्रह रुक जाता है, O2 उत्पादित वाले केन्द्रों तथा प्रकाश रासायनिक प्रतिक्रिया केन्द्रों से होने वाली क्षति को कम करता है तथा उचित इलेक्ट्रॉन परिवहन को नियंत्रित करता है, इसी प्रकार यह PSII की सुरक्षा में सहायता करता है [77] |

ब्रसीनोस्टीरोइड्स का अन्य पादप हॉर्मोन्स के साथ अन्तराकर्षण एंव प्रभाव

पादप हॉर्मोन्स का परस्पर प्रभाव विभिन्न अजैव और जैविक प्रतिबलों को सुधारने में सहायता करता है| कुछ विवरणों से यह ज्ञात हुआ है कि ब्रसीनोस्टीरोइड्स आक्सिन के साथ सहक्रियाशीलता दिखाते हैं। मटर (Pisum sativum) की 6 दिन पुरानी पौधों में ब्रसीनोलाइडस और आक्सिन के अनुप्रयोग से तने का बढाव प्रेरित हो गया [78]।  एराबिडापसिस के विषय में, ब्रसीनोस्टीरोइड्स ने आक्सिन के साथ परस्पर सहक्रियाशीलता प्रभाव दिखाया और जड़ों में आक्सिन का ऊर्ध्ववर्धी परिवहन (acropetal transport) बढ़ाकर पार्श्व विकास में भी उन्नति दिखाई [34]। चावल की पौध में ब्रसीनोस्टीरोइड्स और जिब्रेलिक एसिड के सह- आवेदन ने कुछ विशिष्ट जीन्स की अभिव्यक्ति को संचालित करके उनके विकास और उन्नति को पदोन्नत किया [79]। चेन एवं सहयोगी (2004) और उल्लाह एवं सहयोगी (2002) के अनुसार एराबिडापसिस (Arabidopsis) में, ब्रसीनोस्टीरोइड्स और जिब्रेलिक एसिड ने एक साथ GPA1 (Arabidopsis के विषय में G प्रोटीन अल्फ़ा-सबयूनिट) की अभिव्यक्ति को संचालित करने के द्वारा बीज अंकुरण को वर्धित किया|  कुरेपिन और सहयोगियों (2008) ने उष्मा प्रतिबल (thermal stress) में सरसों (Brassica napus) के पौधों पर एबसाइसिक एसिड और ब्रसीनोलाइडस के परस्पर प्रभाव का अध्ययन किया था। उष्मा प्रतिबल देने से 1 घंटे पहले ब्रसीनोलाइडस (10-6 M) सांद्रता का प्रयोग किया गया, और उष्णता प्रतिबल के पौधों की तुलना में एबसाइसिक एसिड की मात्रा दुगनी पाई गई| इस अवलोकन से यह ज्ञात हुआ कि पौधों को ब्रसीनोस्टीरोइड्स द्वारा प्रदान किया गया उष्णता प्रतिबल एबसाइसिक एसिड के आंतरिक स्तरों को बढ़ाता है। लाइची, फार्मर, वेंग और सहयोगियों (2002) ने पादप  प्रतिरक्षा प्रणाली में जैसमोनिक एसिड और एथिलीन की भूमिका के बारे में रिपोर्ट किया था| ये हॉर्मोन्स ब्रसीनोस्टीरोइड्स द्वारा प्रतिबल सहिष्णुता को मध्यस्थता करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं| मूंग के इपीकोटाइल खंडों में ब्रसीनोस्टीरोइड्स का प्रयोग करने से एथिलीन उत्पादन बढ़ गया [84, 85] | यह सूचित किया गया था कि ऐराबिडापसिस (A. thaliana) में ब्रसीनोस्टीरोइड्स, साइटोकाईनिन और आक्सिन, एथिलीन उत्पादन में सहायता करते हैं [86]।

भविष्य की संभावनाएं

भविष्य में होने वाली खोज पौधों की वृद्धि करने वाले हार्मोन के इस समूह में अधिक योगदान करेगी। ब्रसीनोस्टीरोइड्स के शारीरिक गुणों पर होने वाली अनगिनत खोजें अत्यधिक क्षमता वाले अनुकूलित प्राकृतिक स्टेरॉयड के लिए सुनिश्चित करती है, जो कि पादप की सुरक्षा तथा खेती की उपज वृद्धि में उपयोगी होंगे [6]। ब्रसीनोस्टीरोइड्स को इस्तेमाल करने की प्रमुख कमियों में से एक कमी उसकी उच्च लागत है। चीन और जापान की बहुत सी कीटनाशक कंपनियों ने ऐसे ब्रसीनोस्टीरोइड्स का संश्लेषण प्रारंभ किया है जिनको वे कृषि पद्धतियों में संभावित रूप से उपयोग कर सकेंगे। भारत में एक निजी एग्रोकेमिकल उद्योग ने बाजार में होमोब्रसीनोलाइडस की शुरुआत की है। जैसे ही ब्रसीनोस्टीरोइड्स की लागत कम कर ली जाएगी, वैसे ही फसल की पैदावार में सुधार करने के लिए ब्रसीनोस्टीरोइड्स द्वारा रासायनिक आश्वासन जल्द ही हासिल किया जा सकेगा।

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2 Comments

  1. Arun

    June 30, 2016 at 1:11 am

    Good article Dr Dhrti and others.

  2. Dr. Prashant Pant

    Dr. Prashant Pant

    July 1, 2016 at 3:45 pm

    Very informative and concurrent. Already receiving a lot of appreciation from hindi readers.

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