सम्पादकीय-मई 2016 अंक

Editorial May 2016

“स्वदेशी विज्ञान” ई-जर्नल के मई 2016 के अंक में हम कुछ सम-सामयिक घटनाओं जैसे “बढते मानव-वन्य जीव संघर्ष”, “दावानल: कारण, क्षति एवं उपचार”, “प्राकृतिक आपदाएं एवं मानव के क्रियाकलापों का उनमे योगदान”, “आनुवांशिक रूप से रूपांतरित पादप व उनसे उत्पन्न होने वाले सामाजिक-आर्थिक प्रभाव”, एवं कुछ अभिनव विषयों जैसे “ई-फ़्लोरा” पर चर्चा करेंगे.

मौसम के मामले में अभी तक यह साल भारत वर्ष के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा है. “द गार्डियन” (The Guardian; www.theguardian.com) में छपी नासा (NASA) की हाल की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष फ़रवरी से अप्रैल 2016 के तीन महीनों ने वैश्विक तापन (Global Warming) के पिछले सभी रिकार्डों (1951-1980) को तोड़ दिया है. इस भीषण बदलाव के लिए एल-नीनो (El Nino) के द्वारा उत्पन्न हुई गरम हवा को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है. इस बढें हुए तापमान का प्रभाव पृथ्वी के स्थलीय एवं जलीय दोनों घटकों में समान रूप से देखा गया है. यह बदलाव इतना बड़ा है कि वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु-आपातकाल (Climate Emergency) घोषित कर दिया है. कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में इस प्रकार से बढते तापमान एवं शुष्क होते मौसम ने दावानलों (Forest Fires) को आमंत्रित कर पर्यावरणीय समस्याओं को और गंभीर बना दिया है जिसका  प्रत्यक्ष उदाहरण उत्तराखंड के वनों में लगी भीषण आग है जिसपर एक लेख इस अंक में प्रकाशित किया जायेगा.

इसी महीने की 8 तारीख को शुरू हुई विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा जिसमे केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री पर भी एक लेख के माध्यम से इन अति-संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों पर वहनीय क्षमता (Carrying Capacity) से अधिक भार के कारण पड़ने वाले प्रभावों की भी चर्चा की जाएगी. एक रिपोर्ट के अनुसार इस यात्रा के दस दिनों के भीतर ही कई हज़ार तीर्थयात्री केदारनाथ में दर्शनो के लिए उमड़ चुके है, यही हाल बाकी जगहों का भी है.

हाल ही में नवीनतम परिचर्चा का मुद्दा बने आनुवांशिक रूप से रूपांतरित फसल (Genetically Modified Crop) उदाहरणस्वरुप बीटी कपास (Bt Cotton) की वर्तमान वस्तुस्थिति (current status), भविष्य, तथा केस अध्ययनों पर एक लेख के माध्यम से प्रकाश डालेंगे. इसके साथ, शैक्षिक तथा अनुसंधान के क्षेत्र में एक अभिनव युक्ति जैसे पादप ई-फ़्लोरा (e-flora), जिसमे पारंपरिक पादप वर्गीकरण ज्ञान (Plant Taxonomy) को सूचना संचार विज्ञान (Information Communication Technology) की तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर साझा करने में सहायता मिलती है, के बारे में चर्चा की जाएगी.

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सधन्यवाद,

मुख्य कार्यकारी संपादक

डॉ. अरुण कुमार मौर्य एवं डॉ. प्रशांत पंत

दिनांक:17 मई, 2016

Dr. Arun Kumar Maurya
डॉ. अरुण कुमार मौर्य, एक शिक्षक, शोधकर्ता और लेखक के रूप में दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं. डॉ. मौर्य ने पादप कार्यिकी एवं जैव-रसायन में विशेषज्ञता के साथ वनस्पति विज्ञान में एम.फिल और पीएचडी प्राप्त किया है. वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में विधि स्नातकोत्तर में अध्ययनरत हैं. उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से बौद्धिक संपदा अधिकार कानून (PGDIPRL) (एनएलएसआइयू), बंगलौर से एक डिप्लोमा भी अर्जित किया है. वे एक उत्साही वन्य जीव फोटोग्राफर भी हैं तथा उन्होंने इस सम्न्बंध में कई लेख लिखे हैं.

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