सम्पादकीय: “फ़्लोरा ऑफ़ ब्रिटिश इंडिया“ के अध्येता सर जे. डी. हुकर, जे. हचिन्सन और एक भारतीय वनस्पतिविद

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 प्रोफेसर गणेश शंकर पालीवाल

वर्ष 1968 में मुझे जब भारत एवं इंग्लैंड के बीच संचालित ब्रिटिश काउंसिल की युवा वैज्ञानिक आदान–प्रदान योजना के अंतर्गत 3 माह के लिए रॉयल बोटेनिकल गार्डन्स, क्यू, रिचमंड, लन्दन (Royal Botanic Gardens, Kew, London) की जौडरैल प्रयोगशाला (Jodrell laboratory) में कार्य करने का अवसर मिला तो मानो मेरी मन की सारी मुराद पूरी हो गई, क्योंकि यहाँ सी. आर. मेटकाफ जैसे विश्व प्रसिद्ध पादप शरीर विज्ञानी (Plant Anatomist) मेरा शोध में मार्ग दर्शन करने वाले थे|

धीरे-धीरे मैं वहां की कार्यविधि से अवगत हो गया और कार्यशोध आगे बढ़ने लगा| मैं वहां विविध पुस्तकालय और पाद्पालय (Herbarium) में भी जाने लगा तथा कई वर्गीकरण-विदों (taxonomists) के दर्शन लाभ का शुभ अवसर मिला| जब मुझे एक दिन एक केबिन में बैठकर सतत कार्यरत 83 वर्ष के वर्गीकरण-विद सर जे. हचिन्सन की ओर इंगित किया गया तो मैं आत्म–विभोर हो बैठा क्योंकि बी.एस.सी. एवं एम.एस .सी. की कक्षाओं में इनका पुष्पीय पादपों का वर्गीकरण समझना और परीक्षा में प्रस्तुति करना हमारे लिए बड़ी चुनौती थी|

अत: जब डरते डरते मैंने उनके पास जाकर किंचित वार्ता करने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा “कल 3 बजे आइये, हम लम्बी वार्ता करेंगे”| दरअसल वे अपनी पुस्तक “फैमिलीज़ ऑफ़ फ्लावेरिंग प्लांट्स” (Families of flowering Plants) (1926) का नया संस्करण तैयार कर रहे थे और उस दिन यूफोरबिएसी (Euphorbiaceae) कुल की पांडुलिपी उनके हाथों में थी.

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चित्र 1 : सर जे.डी.हुकर

दूसरे दिन समय पर जब मैं उनके कक्ष में पहुंचा तो उन्होंने गर्म जोशी से उठकर मुझसे हाथ मिलाया और कहा कि, “आज मुझे एक भारतीय वनस्पति विज्ञानी को यह बताते हुए प्रसन्नता है कि आज मैं वनस्पति विज्ञान में जिस स्तर पर खड़ा हूँ, उसके लिए सारा श्रेय भारत का ही है| मेरी खुली आँखें और विस्मय को निहारकर उन्होंने कहना प्रारंभ किया, “मेरे पिता भी क्यूगार्डन में माली के पद पर कार्यरत थे, और उस समय सर जे.डी.हुकर (चित्र 1) उनके निदेशक थे| एक विशेष अवसर पर व्यक्तिगत कार्य के लिए उन्होंने 15 दिन का अवकाश माँगा जिसे अस्वीकार कर दिया गया| काफी अनुनय-विनय करने पर उन्होंने इस शर्त पर अवकाश स्वीकृत करने का आश्वासन दिया कि वे अपने स्थान पर अपने जैसा ही एक कुशल माली, 15 दिन के लिए लेकर आएंगे| दुर्भाग्य से 7 दिन की गहन खोज-बीन के उपरांत भी वे ऐसा न कर पाए, तो अपने पुत्र हचिन्सन को ले जाकर उन्होंने सर हुकर के सम्मुख खड़ा कर दिया और कहा के वे किसी कुशल माली को ढूँढने में सफल नहीं हो सके, अत: अपने पुत्र को ही ले आये हैं, वे कृपया उसी से ही काम चलायें जो 18 वर्ष का होने पर भी कभी स्कूल नही गया है और सारे दिन मात्र क्रिकेट ही खेलता रहता है| इस प्रकार जे. हचिन्सन को क्यू गार्डन में 15 दिन के लिए काम मिला| माली का दैनिक कार्य पूरा हो जाने पर उनका एक नियत कार्य था की वे सर हुकर की सहायता करें| इसके लिए उन्हें निदेशक के कक्ष के सामने वाले एक स्टूल पर बैठा दिया गया जिसमें हुकर द्वारा एकत्र किये गये पादपों की हर्बेरियम शीटें (Herbarium sheets) व्यवस्थित थीं| उनका कार्य था, हुकर की आगया होते ही विशिष्ट क्रम की शीट उन तक पहुंचाना| कार्य प्रारंभ हुआ और हचिन्सन क्रमश: पादपों के नमूनों को हुकर के पास अध्ययन के लिए पहुंचाते रहे, जो उनका बारीकी से नग्न आँखों और लेन्स (lens) से निरीक्षण कर अपनी टिप्पणियां लिखते जाते थे| एक बार युवा हचिन्सन की जिज्ञासा जाग्रत हुई और वे उनकी कुर्सी के पीछे खडे होकर देखने लगे कि आखिरकार यह वृद्ध सज्जन ‘हुकर’ इन निर्जीव पादप शीटों को बार–बार इतनी गंभीरता से क्यों देख रहे हैं? और इनमे विशेष रहस्य की बात क्या है? थोड़ी देर में हुकर को यह आभास हो गया कि युवक माली उनके पीछे खड़ा है, तो उन्होंने उसे झिड़कते हुए कहा “जाओ और अपने स्टूल पर बैठ जाओ”| हचिन्सन को बहुत बुरा लगा और उन्होंने घोर परिश्रम के उपरांत पादप वर्गीकरण के सिद्धांतों का अध्ययन किया. ‘कुली’ के रूप में अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया की विशद यात्राएं की, उष्ण-कटिबंधी क्षेत्रों की सघन वनस्पति को निकट से देखा और विस्तृत टिप्पणियां भी तैयार की| अब तक वे एक कुशल पादप वर्गीकरण-विद (Plant taxonomist) बन चुके थे और उन्हें क्यू में ही एक सम्मानजनक पद पर नियुक्ति मिली| अंतत: एक दिन वह भी आया जब उन्हें सर हुकर द्वारा रचित पुस्तक “जेनेरा प्लेनेटेरम” (Genera Plantarum) का पुनरीक्षण (revision) करने का अवसर मिला| तब उन्होंने लिखा हुकर को संभवत: यह अंदाज़ा भी नहीं रहा होगा कि वह युवक जिसे उन्होंने हिक़ारत से झिड़ककर स्टूल पर जाकर बैठने के लिए कहा था, एक दिन उनकी अपनी पुस्तक “जेनेरा प्लेनटेरम” (Genera plantarum) का पुनरीक्षण करेगा |

Ganesh Shankar Paliwal
मुख्य संरक्षक, स्वदेशी विज्ञान पी.एच.डी., डी.एस.सी.(सेवा निवृत) विभागीय अध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, ह.न.ब. यूनिवर्सिटी, गढ़वाल

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