कर्क रोग (कैंसर): नवीनतम आंकड़े

डॉ. मनुस्मृति सिंह

Center for Nanoscience and Nanotechnology & Department of Cell Research and Immunology,

Tel-Aviv University, Israel

कैंसर दुनिया भर में रुग्णता और मृत्यु दर का दूसरा प्रमुख कारण है। यद्यपि भारत में पहले सबसे अधिक मौतें संचारी रोग (communicable disease) के कारण होती थीं। लेकिन वर्तमान मे गैर-संचारी रोग से मृत्यु दर लगभग 53% बराबर हैं, जिनमें कैंसर भी एक मुख्य कारण है (WHO, 2011 )।  कैंसर 100 से अधिक रोगों के समूह का नाम है जिसमें कोशिकाएं अनियंत्रित होकर विभाजित होने लगती हैं। कई कैंसर ठोस  ट्यूमर (आबुर्द) का निर्माण करते हैं, जबकि रक्त के कैंसर, जैसे कि ल्यूकेमिया, आम तौर पर ठोस ट्यूमर नहीं बनाते हैं।अनियंत्रित कैंसर कोशिकाएं समीप के ऊतकों में आक्रमण (invasion) करके या, कुछ कैंसर की कोशिकाओं को रक्त से या लसीका तंत्र के माध्यम से शरीर में दूर के अंगों तक यात्रा कर के मूल ट्यूमर से अलग नए ट्यूमर बना सकते हैं। इससे अन्य अंगों के कार्य प्रभावित होते हैं जो कि मृत्यु के मुख्य कारण बन जाते हैं।
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च आन कैंसर (IARC) ग्लोबोकैन के अनुसार, 2012 में जहां विश्वभर में, कैंसर से 1.4 करोड़ नए कैंसर के मामले और 80 लाख मौतें हुईं, वहीँ भारत में ये आंकड़े, 10 लाख नए कैंसर के मामले और 7 लाख मृत्यु रहे। ये दरें प्रत्येक वर्ष लगातार बढ़ रही हैं. इस अनुमान के अनुसार कैंसर से हुई मृत्यु संख्या 2035 तक बढ़कर 12 लाख हो जाएगी (Ferlay et al., 2012)। कुछ कैंसर के मामले हमारे माता-पिता से होने वाले आनुवांशिक परिवर्तन के परिणामस्वरुप होते हैं। वे किसी व्यक्ति के जीवनकाल के दौरान उत्पन्न होने वाली आनुवांशिक त्रुटियों के इकट्ठे होने से हो सकते हैं- जैसे कि कोशिकाएं विभाजित होते समय या कुछ पर्यावरणीय जोखिमों के कारण डीएनए को नुकसान पहुंचना। कैंसर के कारण पर्यावरणीय जोखिम भी हैं, जैसे तंबाकू (70 से ऊपर कैंसरजनक रसायन), और विकिरण (सूरज की पराबैंगनी किरणें)। एक शोध के अनुसार सभी कैंसर के मामलों में से केवल 5-10% आनुवंशिक दोषों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जबकि शेष 90-95% पर्यावरण और जीवन शैली में बदलाव के कारणवश होते हैं (Anand et al., 2008)। यही रिपोर्ट आगे दर्शाती है कि सभी कैंसर संबंधी मृत्यु में लगभग 25-30% तम्बाकू के कारण होती है, जिनमें से 30-35% आहार से जुड़ी होती हैं, लगभग 15 से 20% संक्रमण (मानव पेपिलोमा वायरस (HPV), हेपेटाइटिस बी (HBV) और हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV), एपस्टीन बार वायरस (EBV), और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी) के कारण होती हैं, और शेष प्रतिशत अन्य कारणों से होता है, जैसे- विकिरण, तनाव, शारीरिक गतिविधि, पर्यावरण प्रदूषण आदि।
विश्वभर में पुरुषों में कैंसर की सबसे आम साइटों मौखिक गुहा (oral cavity), फेफड़े और आमाशय होते हैं; महिलाओं में, सबसे आम कैंसर स्तन, ग्रीवा और मुखीय गुहा हैं। भारत में कैंसर की सभी मौतों का 50%- पुरुषों में मुखीय और फेफड़ों के कैंसर और महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है (Anand et al., 2008)। दुनियाभर में जहाँ कैंसर के लिए तम्बाकू उपयोग सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है और लगभग 22% कैंसर के लिए जिम्मेदार है (GBD Risk Factors Collaborators, 2015), भारत में 40% कैंसर, मुख्यतः  तंबाकू के उपयोग के कारण होता है (Dikshit et al., 2012)।
2010 के आंकड़ों के मुताबिक 30-69 आयु वर्ग के पुरुषों में सबसे घातक मौखिक (22.9%), आमाशय (12.6%) और फेफड़े (11.4%) का कैंसर और इसी आयु वर्ग की महिलाओं में सबसे घातक गर्भाशय-ग्रीवा (17.1%), आमाशय (14.1%), स्तन (10.2%) और मुखीय (9.8%) कैंसर पाए गए (Dikshit et al., 2012)।
चित्र 1- 2012 में पुरुषों और महिलाओं में कैंसर की घटनाएं

चित्र 1- 2012 में पुरुषों और महिलाओं में कैंसर की घटनाएं

भारत में इस महामारी के अध्ययन के दौरान कुछ रोचक तथ्य भी सामने आये। जैसे मुखीय कैंसर शहरों और गावों दोनों जगह कैंसर का कारण है, अपितु फेफड़ों का कैंसर शहरों में और आमाशय का कैंसर गावों के नागरिकों में अत्यधिक होता है। संक्रमण से होने वाले कैंसर गावों में ज़्यादा पाए गए। शेष 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में 9 गरीब राज्य (असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश) में महिलाओं और पुरुषों की तुलना में कैंसर की मौत का जोखिम कम पाया गया।भारत में सबसे शिक्षित (45.7 / 100000) वर्ग के मुकाबले कम से कम शिक्षित (106.6 / 100000) में मृत्यु दर दुगुनी है (Dikshit et al., 2012) (चित्र 2 क, ख )।
कैंसर रोग की बढ़ती तादात के चलते सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 1975 में राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम स्थापित किया, जिसका उद्देश्य कैंसर के बारे में जागरूकता, रोकथाम, और उपचार संबधी विस्तृत जानकारी प्रदान करने हेतु की गई है। अत्यधिक फलों और सब्जी का सेवन, शारीरिक गतिविधि और सही बॉडी मास इंडेक्स, जैसे उपायों के माध्यम से कैंसर उन्मूलन की दिशा में शिक्षा के प्रसार से कैंसर मृत्यु दर में घटाव होगा (GBD Risk Factors Collaborators, 2015)। तंबाकू नियंत्रण पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन के जोरदार कार्यान्वयन के माध्यम से तम्बाकू उत्पादों के उपयोग को कम करने, और, दीर्घ अवधि में, खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध प्रयास के परिणामस्वरूप तम्बाकू-सेवन से जुड़े कैंसर की मृत्यु दर में भी घटोत्तरी होगी.
चित्र 2-भारत में अनुमानित मृत्यु दर कैंसर के मामले- राज्यवार- 2014 [6]

चित्र 2(क) -भारत में अनुमानित मृत्यु दर कैंसर के मामले- राज्यवार- 2014 (Source: http://pib.nic.in/newsite/printrealease.aspx?relid=106424)

 

 

चित्र 2(ख)- भारत में अनुमानित कैंसर के कारण मृत्यु- 2014 ()

चित्र 2(ख)- भारत में अनुमानित कैंसर के कारण मृत्यु- 2014 (http://pib.nic.in)

 

सन्दर्भ:
1. WHO, 2011 . Non-communicable diseases country profiles 2011. http://whqlibdoc.who.int/publications/2011/9789241502283_eng.pdf
2. Ferlay J, Soerjomataram I, Ervik M, et al. GLOBOCAN 2012 v1.0, Cancer Incidence and Mortality Worldwide: IARC CancerBase No. 11.Lyon, France: International Agency for Research on Cancer, 2013. http://globocan.iarc.fr
3. Anand P, Kunnumakara AB, Sundaram C, et al., 2008 Cancer is a preventable disease that requires major lifestyle changes. Pharmaceutical Research. 2008 Sep; 25(9): 2097-2116.
4. GBD 2015 Risk Factors Collaborators. 2015. Global, regional, and national comparative risk assessment of 79 behavioural, environmental and occupational, and metabolic risks or clusters of risks, 1990-2015: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2015. Lancet. 2016 Oct; 388 (10053):1659-1724.
5 . Dikshit R, Gupta PC, Ramasundarahettige C, et al, 2012. for the Million Death Study Collaborators. Cancer mortality in India: a nationally representative survey. Lancet 2012; 379: 1807–16.
6 .  Estimated Mortality cancer cases in India – Statewise – All sites- (2011-2014) – Both sexes. Indian Council of Medical Research (ICMR), Based on Cancer incidence cases and Pooled M/I ratio of Mumbai data (2009-2011) report.   http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=106424
Dr. Manusmriti Singh

डॉ. मनु स्मृति सिंह शोधकर्ता और लेखक हैं. इन्होंने जर्मनी की बॉन यूनिवर्सिटी से पीएचडी प्राप्त किया है। वर्त्तमान में ये कैंसर नैनोमेडिसिन पर इज़राइल के टेल अवीव यूनिवर्सिटी में शोध कार्य कर रही हैं. बायोटेक्नोलॉजी में पांडिचेरी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर हैं। इन्हें कैंसर शोध में 9 वर्ष का अनुभव है और 7 वर्षों से हैदराबाद से प्रकाशित नैनोडिजस्ट में ‘नैनोमेडिसिन अप्डेट्स’ कॉलम की लेखिका रही हैं.

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