आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD) : भविष्य हेतु भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए स्वदेशी तकनीक

RLV

लेखक: चिरंथ राजशेखर

अनुवाद एवं संपादन: डॉ. अरुण कुमार मौर्या एवं डॉ. प्रशांत पंत

Citation: Rajshekhar, C., 2016. आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD) : भविष्य हेतु भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए स्वदेशी तकनीक. स्वदेशी विज्ञान, Volume 1, अंक 3 (जून). Available at http://swadeshivigyan.com/rlvtd/

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) (ISRO-Indian Space Research Organisation) ने देश के  प्रथम पंखयुक्त एयरोस्पेस शटल (Aerospace Shuttle) का सफल परीक्षण किया। भारत का यह प्रथम प्रयास है, जिसमे उसने एक पुनरूपयोगी प्रक्षेपण यान (Reusable Launch Vehicle, RLV) विकसित किया है (चित्र 1)। यह अंतरिक्ष यान को कक्षा में भेजने तथा पृथ्वी की सतह पर सुरक्षित वापस लाने में सक्षम है। इससे भविष्य मे प्रक्षेपण यानो के निर्माण में आने वाली लागत मे काफी कमी आएगी। पूर्णतः विकसित होने पर, यह प्रक्षेपण यान अंतरिक्ष यान तथा उपग्रहों को अंतरिक्ष मे प्रक्षेपित करने के पश्चात पृथ्वी के वायुमंडल में उच्च दाब, ताप तथा अन्य बाधाओं को पार करते हुए अंततः पृथ्वी पर वापस आ सकेगा।

Before launch

चित्र 1: प्रक्षेपण से पूर्व आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD). (स्रोत: www.isro.gov.in/rlvtd/)

 

परिचय
अंतरिक्ष अन्वेषण तथा उपयोग एक आर्थिक रूप से खर्चीला क्रियाकलाप है। अंतरिक्ष संबंधी क्रियाकलाप की उच्च लागत ही इसकी प्रगति का सबसे बड़ा बाधक है। औसतन, विश्वस्तर पर एक मध्यम से भारी रॉकेट निर्माण में लगभग 20,0000 अमेरिकी डॉलर की लागत आती है। अतः इस उच्च लागत में कमी करने से निम्न फायदे स्पष्ट नज़र आते है। प्रथम, यह अंतरिक्ष अनुसंधान में त्वरण लाएगा जो उनके तकनीकी  विकास में सहयोगी होगा। द्वितीय, यह वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाज़ार में उच्च मांग तथा आपूर्ति को बढा कर इसकी वृद्धि दर को तीव्र करेगा। इसे पुनरूपयोगी प्रक्षेपण यान-तकनीकी प्रदर्शक (Reusable Launch Vehicle-Technology Demonstrator; RLV-TD) कहा गया है (चित्र 2)। यह तकनीकी न्यून लागत, विश्वसनीय तथा मांग पर अंतरिक्ष पहुँच प्राप्त करने के लिए सर्वसम्मत समाधान है। ऐसा माना जा रहा है कि यह नवीन तकनीकी अन्तरिक्ष यान के प्रक्षेपण लागत को लगभग 10 गुना कम कर देगी।

rlv being transpoted

चित्र 2: पुनरुपयोगी प्रक्षेपण यान (स्रोत: www.isro.gov.in/rlvtd/)

उद्देश्य
यह नवीन प्रोद्योगिकी पंखों वाला एयरोस्पेस शटल है जोकि हाइपरसोनिक (ध्वनि की गति से ज्यादा तेज़) उड़ान भरने में सक्षम है। आर.एल.वी-टी.डी. (RLV-TD) के तीन महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं:
1. हाइपरसोनिक उड़ानों की एयरो थर्मोडायनमिक्स (Aero Thermodynamics) के लक्षणों का परीक्षण।
2. हाइपरसोनिक विमानों के स्वायत्त मिशन प्रबंधन का परीक्षण करना ।
3. यानों के पुनः पृथ्वी में प्रवेश की तकनीकी का परीक्षण एवं प्रदर्शन।

तकनीकी/प्रौद्योगिकी

आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD) एक 1.7 टन वजनी और 6.5 मीटर लंबा तथा चिकने पंखों से युक्त है। यह अपने वजन तथा आकार के कारण स्पोर्ट्स यूटिलिटी विमान के जैसा लगता है(चित्र 2, 3)। इस अंतरिक्ष यान के विकास  एवं निर्माण में कई वर्ष लगे तथा इसमें लगभग 95 करोड़ ₹ का निवेश इस प्रोजेक्ट में किया गया है। इस उड़ान का उद्देश्य ध्वनि की गति से भी अधिक गति से वायुमंडल में प्रवेश कर रहे यान के यथास्थिति में बने रहने की योग्यता का परीक्षण किया जायेगा।

RLV mounted

चित्र 3: RLV-TD राकेट बूस्टर के ऊपरी सिरे पर लगाया गया (स्रोत: www.isro.gov.in/rlvtd/)

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि एक पारंपरिक प्रक्षेपण यान अपनी उड़ान का सबसे कम समय वायुमंडल मे बिताता है तथा इसके अलावा एक एयरक्राफ्ट मैक 1 से 2 तक की सीमित गति की उड़ान को अनुभव करता है जबकि दूसरी ओर आर.एल.वी.-टीडी (RLV-TD) एक वृहद परास (range) का अनुभव करता है।

अतः आर एल वी तकनीक एक अधिक जटिल  प्रोद्योगिकी है। यह जटिलता उसमें मार्गदर्शन (Navigation) तथा नियंत्रण (Control) प्रणाली के कारण है और इसीलिए इसके परीक्षण का नाम हाइपरसोनिक परीक्षण-I (Hypersonic Experiment; HEX-I) कहा गया है।

आर.एल.वी. -टी.डी. (RLV-TD) को डिजाईन, असेंबली तथा आधारिक विद्युतीय, हाईड्रोलिक तथा साइन चेक परीक्षण किये गए। हाइपर सोनिक गति प्राप्त करने का राज इसकी संरचना का हाइपरसोनिक लक्षणों का युक्त होना (जैसे, पंखयुक्त)। इसका नियंत्रण एवं मार्गसंचालन तंत्र का होना है। आर.एल.वी. -टी.डी. (RLV-TD) के संरचना का परीक्षण, जो तप्त संरचनाओं का बना है एवं स्वायत्त मिशन प्रबंधन जिससे इसे किसी विशिष्ट स्थिति पर उतारा जा सके, शामिल था।

संपूर्ण आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD) तंत्र जो उड़ान दशाओं के लिए मशीनीकृत रूप से जुड़ा तथा सिमुलेशन के अनुसार चल सकता है। यह इसरो के बनाये गए सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर के द्वारा वास्तविक उड़ान प्रोफाइल को मशीनीकृत एक्चुएटर (प्रवर्तक) [हाइड्रोलिक पाइपलाइन के द्वारा पूर्ण], संपूर्ण नेविगेशन एवं मार्गदर्शन नियंत्रण के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सिमुलेट किया गया था। पारंपरिक प्रक्षेपण यानों में तापमान जैसे कारक का मुख्य क्राइटेरिया न होने के कारण संरचनात्मक तत्वों को ठंडा संरचना कहते हैं। लेकिन आर.एल.वी.टी-डी (RLV-TD) में तापीय स्थायित्व (Thermo-structural Stability) तत्वों के महत्वपूर्ण होने में कारण यह महत्वपूर्ण  हो जाता है। जिसके कारण इसमें कार्बन-कार्बन कम्पोजिट संरचना का  उपयोग किया गया है। इसी संरचना को तप्त संरचना (hot structure) कहा गया है। HEX-I में, पंखयुक्त आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD) एक डेमो है, जिसमे स्वयं की उड़ान हेतु कोई शक्ति स्रोत नही है। इस परीक्षण में केवल बूस्टर कि सहायता से आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD) मैक 5 (mach 5) कि उडान व्यवस्था को प्राप्त कर सकेगा। HEX-I मिशन कि समाप्ति पर  यान सागर में उतर जायेगा। उड़ान से लेकर उतरने तक का कुल समय लगभग 10 मिनट रहा है, हालाँकि, इसरो के आर.एल.वी.-टी.डी. (RLV-TD) कार्यक्रम का परम उद्देश्य एयरब्रीदिंग प्रोपल्शन के द्वारा दो चरणों में पृथ्वी की कक्षा में प्रक्षेपण क्षमता को प्राप्त करना है, इसके लिए इस प्रोद्योगिकी को मैक 0 से 25 तक के व्यापक परास में कार्य करने हेतु क्षमता प्रदान की गयी है।

समयवार प्रक्षेपण कार्यक्रम

  1. अंतर्राष्ट्रीय मानक समय (IST) 7:00 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के प्रक्षेपण पैड (Launching Pad) से आर एल वी को ले जा रहा ठोस राकेट बूस्टर HS9 ने उड़ान भरी।(चित्र 4, 5)
    Lift off

    चित्र 4: उड़ान भरता हुआ RLV-TD. (स्रोत: www.isro.gov.in/rlvtd)

    Mounted

    चित्र 5: उड़ान के दौरान RLVTD की स्थिति. (स्रोत: www.isro.gov.in/rlvtd/)

  2. 91.1 सेकंड्स की सफल 56 किलोमीटर की उडान के बाद HS9 जलकर समाप्त हुआ और तब HS9 के शीर्ष पर उपस्थित आर एल वी –टी डी HS9 बूस्टर से अलग होकर 65 किलोमीटर की और ऊँची उड़ान भरी और वायुमंडल से बाहर आ गया।
  3. इसके बाद आर एल वी –टीडी ने अपनी दिशा वापस पृथ्वी कि और बदली और पुनः वायुमंडल में प्रवेश किया। प्रवेश करते ही उसकी गति मैक 5 (ध्वनि की गति से 5 गुना ज्यादा) हो गयी और यान तेज़ी से पृथ्वी कि ओर बढने लगा।
  4. इस दौरान तापमान नियन्त्रण (thermal protection system), गति नियंत्रण, दिशा नियंत्रण, नेविगेशन, मार्गदर्शन प्रणाली का निरीक्षण किया गया। सभी प्रणालियों ने सुचारू रूप से अपना कार्य किया और आर.एल.वी.टी-डी (RLV-TD) सुरक्षित रूप से पूर्वनिर्धारित बिंदु पर बंगाल की खाड़ी में, श्रीहरिकोटा से लगभग 450 किलोमीटर कि दूरी समुद्र में उतर गया, जिससे इसके मिशन के सभी उददेश्य पूर्ण हुए।
  5. पूरी उड़ान के दौरान यान की ट्रैकिंग एवं नियंत्रण श्रीहरिकोटा स्थित एक भूमिगत स्टेशन तथा एक जहाज पर स्थित टर्मिनल द्वारा नियंत्रित किया गया ।
  6. इस तकनीक प्रदर्शन उड़ान को लांच होने से उतरने तक 770 सेकंड्स का समय लगा। चित्र 6 इस पूरी प्रक्रिया को दर्शाता है।

    rlv-td-3

    चित्र 6: प्रक्षेपण कार्यक्रम का क्रमानुसार विवरण.

निष्कर्ष

इस मिशन की सफलता से इसरो की उपलब्धियों में एक और सफल तीर, तरकश में शामिल हो गया है। इस सफलता से भारत पुनरुपयोग अंतरिक्ष यानों कि दौड़ में कुछ चंद देशों के साथ शामिल हो गया जिनके पास यह तकनीक है जैसे रूस (रूस्कोमास), अमेरिका (नासा), जापान (जक्सा) तथा यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी (इसए). नासा ने अपने अंतरिक्ष शटल के 135 सफल उड़ानों के बाद 2011 में रिटायर कर दिया है। रूस ने बुरान नाम से एक स्पेस शटल बनाया था, जिसने 1989 में केवल एक बार उड़ान भरी थी। इसके बाद फ्रांस और जापान के कुछ शटलों ने प्रयोगात्मक उड़ान भरी है। वर्तमान में आर.एल.वी. (RLV) समुद्र में उतरने के बाद तैरने के लिए तैयार नही है तथा इसके अंतिम विकसित संस्करण आने में 10-15 वर्ष लग जायेंगे।

स्रोत

  1. www.isro.gov.in
  2. http://www.isro.gov.in/rlv-td/reusable-launch-vehicle-technology-demonstrator-rlv-td-images
  3. http://nextgenerationnews.in/2016/05/isro-set-to-launch-indian-space-shuttle/
  4. http://defence.pk/threads/isro-to-launch-reusable-launch-vehicle-technology-demonstrator-rlv-td-in-october.385600/
  5. https://forum.nasaspaceflight.com/index.php?topic=35783.0
  6. http://www.newindianexpress.com/states/kerala/ISROs-RLV-TD-Project-Likely-to-be-Delayed/2015/12/28/article3199197.ece
  7. http://www.slideshare.net/hindujudaic/isros-reusable-launch-vehicle-technology-demonstrator-rlvtd-joining-the-big-boys-club
  8. http://spaceflight101.com/rlv-td-hex-success/
  9. https://i.ytimg.com/vi/7Q0AMz0Qjh0/maxresdefault.jpg
  10. http://pixr8.com/8-key-points-of-indias-own-space-shuttle-rlv-td-successful-launch/
Chiranth is a author, reviewer, teacher and researcher. A distinguished “Tata Fellow”, recipient of two gold medals from University of Agricultural Sciences, Bangalore and double Master’s (twice) from Cornell University, New York, USA and Tamil Nadu Agricultural University, Coimbatore, Tamil Nadu, in the field of Agriculture and Life sciences with specialization in Plant Breeding and Genetics.

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