स्वदेशी विज्ञान ई-जर्नल का दैनिक कार्यक्रम -आज का शब्द

                                   आज का शब्द

प्रिय पाठकों,

स्वदेशी विज्ञान ई-जर्नल आपके ज्ञानवर्धन व जानकारी के लिए एक दैनिक कार्यक्रम ” आज का शब्द” का शुभारम्भ कर रहा है. इस कार्यक्रम में विभिन्न विषयों से सम्बंधित उपयोगी शब्दावली एवं उनकी अद्यतन परिभाषाएं प्रस्तुत की जाएँगी. हम आशा करते हैं कि यह कार्यक्रम आशातीत रूप से सफल होगा अतएव पाठकगण इसको पसंद करेंगे. इस कार्यक्रम के आरम्भ में इस मास का विषय है वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान जोकि इस महीने की 5 तारीख  को मनाये गए विश्व पर्यावरण दिवस  (World Environment Day) को समर्पित  है.

 विषय: वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान

(लेखन, संकलन एवं संपादन: प्रोफेसर गणेश शंकर पालीवाल, मुख्य संरक्षक, स्वदेशी विज्ञान जर्नल)

9 जून , 2016

अपघटित वन: (Degraded Forest)

अपने विशिष्ट स्वास्थ्य, पर्यावरण, वृक्षों की अल्प किरीट (छत्र) सघनता (low crown density), और पुनर्जनन शून्यता (near negligible regeneration) के कारण निम्न श्रेणी में आंकें जाने वाली वन श्रेणी.

10 जून, 2016

वन (Forest)

भूमि का एक विस्तृत भाग, जिसमें वानस्पतिक जातियों, विशेषतः/प्रमुखतः वृक्ष वर्ग को और साथ ही क्षुपों, शाकीय पादप, शैक, मॉस, कवक, जीवाणु, प्रोटोज़ोया, एककोशी, आदि का जटिल समूह आवास करता है और यह ऐसे कीटों (worm) एवं वन्य जीवों को आश्रय प्रदान कर्ता है जो उस स्थान/क्षेत्र विशेष के प्राचलों से आपस में घनिष्ट रूप में सम्बद्ध होते है.

11 जून , 2016

क्रांतिक संकटापन्न प्रजातियाँ (Critically Endangered Species)

वे प्रजातियाँ जिन्हें आवास अपघटन (Habitat Degradation) के कारण वन्य अवस्था में जीवित बने रहने का गंभीर संकट है, और जो कभी भी विलुप्त (Extinct) हो सकती हैं.

12  जून, 2016

भू-स्थैतिक तंत्र (Global positioning System, GPS)

उपकरण जो अक्षांश/देशांतर इंगित करते हुए किसी वस्तु, वृक्ष, भवन अथवा बाहन के सही-सही स्थायी अथवा बदलती स्थिति का संज्ञान प्रदान करता है.

 13 जून, 2016

वन परितंत्र (Forest Ecosystem)

वृक्षों, क्षुपों, शाकों, जीवाणुओं, कवकों, प्रोटोजोआ, संघिपाद, अन्य विविध आकारों के अकशेरुकी, कशेरुकी, आक्सीज़न, कार्बन डाइऑक्साइड, जल, खनिजों एवं अन्य मृत जैविक पदार्थों से मिलकर मानव के सन्दर्भ में परितंत्र का निर्माण.

14 जून, 2016

वन उपज का समान वितरण (Equitable Distribution of Forest Produce)

समुदाय के सदस्यों में वन उपज का विधिक कार्यक्रम सम्बन्धी क्रिया कलापों में, उनकी वास्तविक सहभागिता के अनुरूप आबंटन.

15 जून, 2016

देशज/विशिष्ट क्षेत्रीय प्रजातियाँ (Indigenous species)

ऐसी प्रजाति जिसका आवास क्षेत्र विशेष तक ही सीमित रहता है जैसे Circaeaster agrestis एवं ब्रह्म कमल Saussurea obvallata जो उत्तराखंड की सीमा में पाए जाते हैं.

16 जून, 2016

पारिस्थितिक आपदाएं (Ecological Hazards)

भविष्यवाणी न करने योग्य  ऐसे परिवर्तन जो विशाल क्षेत्र में बृहद स्तर पर पारिस्थितिकी बदलते हुए हानि पहुँचातें हैं. जैसे बाढ़, अकाल, सूखा, तूफ़ान, भूकंप, तड़ाग (बिजली गिरना), वनाग्नि, एवं संक्रामक रोग इस श्रेणी की घटनाएं हैं.

17 जून, 2017

प्रकृति के संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय संघ (International Union of Conservation of Nature and Natural Resources, IUCN)

यह संस्था संकट ग्रस्त पादप (endangered plants) एवं प्राणी प्रजाति (fauna)को उनके विलोपन (extinction) के सापेक्ष खतरे के अनुसार वर्गीकृत करता है. इसका प्रमुख उद्द्येश्य है कि विश्व के सभी समुदायों को प्रभावित, उत्साहित और सहायता प्रदान कर प्रकृति का संरक्षण करना और यह सुनिश्चित करना कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग एक समान और पारिस्थिति की दृष्टि  से सतत हो.

18 जून, 2016

आक्रामक प्रजातियाँ (Invasive species)

बाह्य देशों से किसी देश विशेष में प्रविष्ट करने वाली कुछ पादप/प्राणी-प्रजातियों कि संख्या इस सीमा तक बढ़ जाती है कि देशज (native) जातियों के लिए संकट कि स्थिति उत्पन्न हो जाती है क्योंकि पारितंत्र (Ecosystem) में विक्षोभ  (disruption) हो जाता है. ऐसी प्रविष्ट हुई प्रजातियों को विदेशी अथवा आक्रामक कहा जाता है. कुछ उदाहरणों में  यह देशज जातियों के साथ भोजन और स्थानीय प्राणियों के शिक्कर के क्रम में प्रतिद्वंदिता करती है. अन्य उदाहरणों में अत्यधिक आखेट  अथवा अन्य कारणों के फलस्वरूप कुछ प्रजातियों की संख्या में बहुत कमी आ जाती है. कतिपय नयी प्रजातियाँ ऐसे रोगों कि संवाहक होती है जिनके प्रति मूल प्रजातियों में रोग-रोधिता विद्यमान नहीं होती है.

19 जून, 2016

काष्ठ इतर वन उपज़ (Non Timber Forest Produce, NTFP)

यह सूक्ष्म वन उत्पाद (Minor Forest Produce, MFP) अथवा प्रकाष्ठ इतर वन उत्पाद (Non Wood Forests Produce, NWFP) भी कहलाते हैं. इस श्रेणी में विविध श्रेणियों के प्रकाष्ट एवं जलौनी लकड़ी को छोड़कर, वनों से प्राप्त होने वाली जैविक उद्गम की सामग्री आती है जैसे खाद्य भाग, औषधीय  इवाम सगंध उत्पाद, मसाले, गोंद, रेसिन, तेल-प्रदायी बीज, चर्मशोधन एवं वर्णक पदार्थ , कत्था, रेशे एवं पुष्प, बांस एवं बैंत, एवं अन्य पाद्जन्य वस्तुएं जैसे की तेंदू पत्ते (जो बीडी उद्योग में प्रयोग किये जाते हैं), रीता, पत्तल-निर्मात्री पत्तिया, चारा, वल्कल, आदि. इसके विपरीत प्राणीसमूह से प्राप्त वन उत्पाद है लाख, मोम, खुर, हाथी दांत, कस्तूरी, खालें एवं पंख आदि.

20 जून, 2016

प्रारंभिक कार्य योजना रिपोर्ट (Primary Working Plan Report)

ऐसी रिपोर्ट जिसके आधार पर कार्य योजना अधिकारी, कार्य योजना हेतु अद्यतन आकलन कर क्षेत्र के कार्य प्रारंभ करता है. यह सूचना उन तथ्यों के सारांश का आधार बनेगी, जो कार्य योजना अधिकारी द्वारा भविष्य के प्रबंधन हेतु प्रस्तावों/निर्देशों के रूप में प्रस्तुत किये जायेंगे.

21 जून, 2016

भौगौलिक सूचना तंत्र (Geographical Information System)

यह उपकरण कई विभागों, संस्थानों, सरकारों द्वारा वृहद् स्तर पर दैनिक रख-रखाव एवं गतिशीलता के लिए उपयोग किया जाता है. इसके प्रयोग से परिचालन व्यय में ईंधन एवं समय की बचत होती है और कहीं अधिक दक्ष कार्यक्रम बनाया जा सकता है.

22 जून, 2016

मूल्यांकन (Evaluation)

अपने उद्देश्यों की पूर्ति की दृष्टि  से संपन्न किये जा रहे कार्यक्रमों के महत्व, दक्षता, प्रभावित और सततता की सुचारू और वस्तुनिष्ट जांच की विधि. यह नियत समयाविधि से अधिक समय तक जारी रहने वाली परियोजनाओं के विषय में की जाती हैं. यह उन सक्रियाओं को जो अभी भी चालू हैं के सन्दर्भ में सीखने की प्रक्रिया है, जिससे प्रबन्धकर्ता भविष्य के विकासात्मक कार्यक्रमों के क्रम में उचित योजना निर्माण कर सकें.

23 जून 2016

वन अधिकार अधिनियम (Forest Right Act)

इसके अंतर्गत स्वामित्व, उपयोग, विकास एवं परिवर्धन तथा प्रबंधन के अधिकार आते हैं. प्रथम बिंदु में यह निर्णय लिया गया है कि दिसम्बर 13, 2005 से पूर्व जिन आदिवासियों अथवा वनवासियों के द्वारा वन भूमि पर खेती की जा रही थी उन्हें अधिकतम चार हेक्टेयर की सीमा तक उस पर कृषि करने का अधिकार बना रहेगा और यह अधिकार परिवार विशेष तक ही सीमित रहेगा और किसी भी नई भूमि पर इस तिथि के उपरान्त स्वामित्व का अधिकार नहीं प्रदान किया जा सकता. दूसरा बिंदु दर्शाता है कि उपरोक्त श्रेणी के परिवारों को लघु, वन उपज  और पशु चारा एकत्रण अधिकार है. तीसरे बिंदु में अनधिकृत निष्कासन अथवा बलपूर्वक बेदखल किये जाने पर पुनःस्थापन का अधिकार है. अंतिम बिंदु के अनुसार उनको भी वन प्रबंधन विशेषतः वनों एवं वन्य जीवों के संरक्षण में सहयोग प्रदा करने का अधिकार है.

24 जून 2016

वन संरक्षण अधिनियम(Forest Conservation Act-FCA)

भारत सरकार से अनुमति लिए बिना किसी भी वन भूमि (Forest Land) का उपयोग,वानिकी इतर, (गैर वानिकी) कार्यों के लिए प्रतिबंधित है.

25 जून, 2016

वन-बाह्य वृक्ष (Trees Outside Forest)

वन-बाह्य वृक्षों  में वनों के अतिरिक्त स्थित भू-खण्डकों जिनमें कृषि खण्डक जैसे कि  कृषि-वानिकी तंत्र, कृषि-क्षेत्र वानिकी, औद्योगिक रोपण, बढ़वार एवं वृक्ष –आचादित स्थल, आवासीय एवं आधारभूत क्षेत्र उदहारण के लिए सडकों, गलियों, बगीचिन, एवं अन्य शहरी परिसरों में लगे वृक्षों, नग्न भूखण्डकों जैसे खनन स्थलों में वितरित वृक्ष सम्मिलित हैं.

26 जून,  2016

विलुप्त प्रजातियाँ (Extinct Species)

ऐसी प्राणी एवं वनस्पति प्रजातियाँ जो या तो वन्य स्थिति में  अथवा पृथ्वी से सदा के लिए अदृश्य हो गयी हों.

27 जून, 2016

संकटग्रस्त प्रजातियाँ (Threatened Species)

ऐसी प्राणी एवं वनस्पति जातियां जिनको उत्तरजीविता (survival) का संकट है और जो विलुप्त होने के कगार पर हैं.

28 जून, 2016

संकटापन्न प्रजातियाँ (Endangered Species)

वन्य अवस्था में, जीवित बने रहने के संकट से ग्रसित, दूसरी सर्वाधिक विलुप्ति की ओर अग्रसर प्रजातियों की श्रेणी.

29 जून, 2016

सतत विकास (Sustainable Development)

पारिवर्तन की ऐसी प्रक्रिया जिसमे संसाधनों का उपभोग, निवेश की दिशा, तकनिकी एवं संस्थागत परिवर्तनों के अभिमुखीकरण में समतुल्यता होती है तथा मनुष्य की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं में वृद्धिकारी होती है.

30 जून, 2016

सुभेद्य प्रजातियाँ (Vulnerable/Susceptible Species)

ऐसी वानस्पतिक एवं प्राणीसमूह प्रजातियाँ जो किंचित पारिस्थितिक परिवर्तनों अथवा रोग-जन्य परिस्थितियों से अति शीघ्र एवं सुगमतापूर्वक प्रभावित हो जाती हैं.

01 जुलाई, 2016

संकटापन्न प्रजातियों के व्यापार का अंतर्राष्ट्रीय समझौता (International Convention of Trade in Endangered species)

समस्त विश्व में संकटापन्न (threatened) स्थिति को पहुँच रही/चुकी वन्य प्राणी एवं वनस्पति प्रजातियों और उनके उत्पादों के क्रम में हुआ ऐसा अन्तार्रश्त्रिया समझौता जो इनके व्यापार को इस रूप में नियंत्रित करता है ताकि यह वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपयुक्त मात्र/संख्या में पृथ्वी पर बनी रहें.

2 जुलाई, 2016

विरल प्रजातियाँ (Rare Species)

जीवों के वह समूह, जिनकी शनै: शनै: संख्या न्यून/क्षीण हो गयी है और जो वन्य अवस्था में भी यदा कदा ही दिखाई देती हैं.

3 जुलाई, 2016

मानव समुदाय (Human Community)

मनुष्यों का ऐसा समूह जो एक दुसरे पर निर्भरता, अपनी विशिष्ट  भूमिका, अनिवार्य सदस्यता , और “मैं” और “मेरा” के स्थान पर “हम” और “हमारा” कि भावना लिए, सामन्य जीवन व्यतीत करते हैं.

4 जुलाई, 2016

सहभागिता (Participation):

प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में स्वामित्व की भावना से प्रेरित होकर सभी भागीदारों द्वारा अधिकार एवं उत्तरदायित्व में सहभागिता.

5 जुलाई, 2016

सहभागिता ग्रामीण मूल्य निरूपण:

सतत विकास एवं समुदायों के सशक्तिकरण हेतु विकेंद्रीकृत नियोजन, लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न सामाजिक मूल्यों का सम्मान करते हुए कार्यक्रम नियोजन एवं क्रियान्वन  में स्थानीय निवासियों द्वारा अपनी जीवन परिस्थितियों एवं उनके द्वारा अपनाये जाने वाले क्रिया-कलापों के संबंद्ध  में अपने ज्ञान कि सहभागिता एवं विश्लेषण करना. यद्यपि यह प्रक्रिया बाह्य सुगम्कर्ताओं के द्वारा प्रारंभ की जाती है तथापि एक बार उचित प्रकार प्रारंभ होने के उपरान्त सभी सहभागियों, निम्न वर्गों में उत्साह का संचार हो जाता है तथा वे अपनी परिस्थितियों, उनके सुधार, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन के सम्बन्ध में विश्लेषण करने में बढ-चढ़ कर हिस्सा लेने लगते हैं.

6 जुलाई, 2016

विरल, संकटापन्न एवं संकटग्रस्त प्रजातियाँ (Rare, endangered एंड Threatened Species-RETs)

जीवों (प्राणियों एवं वनस्पतियों में) का वह समूह जिसकी संख्या शनै: शनै: अत्यंत कम/न्यून हो गयी है और जो अब कभी-कभी (विरलतः) ही दिखाई देती है. यह वन अवस्था में जीवित रहने में अक्षम है अथवा विलोपन की ओर अग्रसर है.

7 जुलाई, 2016

वृक्ष (Tree)

एक ऊर्ध्व, ऊंचा पादप जो काष्ठ (wood) निर्मित तना (Trunk) एवं शाखाएं धारण कर्ता है. इसमें शाखाँ (branching) प्रायः 1.37 मीटर के ऊपर प्रारंभ होता है. वृक्षों की आयु कई वर्ष तक की होती है. विश्व का प्राचीनतम वृक्ष 5000 वर्ष तक का आँका गया है. वृक्ष के पांच प्रमुख अंग है- जडें, तना शाखाएं, पत्तियां और पुष्प. वृक्षों की जडें सामान्यतः अंतःभौतिक होती है यद्यपि गरान क्षेत्र  के वृक्षों में यह बाहर निकलती है. बरगद-सम कुछ वृक्ष जातियों  की वायवी जडें वृक्ष को उर्ध्व स्थिति में बने रहने में समर्थन के साथ श्वसन भी करती हैं. जडें वृक्ष के उपरि-भौमिक भागों को मृदा से जल, खनिज एवं हॉर्मोन पहुंचाती है. तना वृक्ष का मुख्या अंग है. यह वल्कल से ढका होता है जो इसे बाह्य कारकों से हुई क्षति से बचाती है. इससे निकलने वाली शाखाएं ऐसी व्यवस्थित होती है कि in पर लगी पतीयाँ अधिक से अधिक प्रकाश गृहण कर सकें. पत्तियां वृक्षों का हरा भाग है जप वायु से कार्बन डाइऑक्साइड गृहण कर जल की सहायता से कार्बोहायड्रेट एवं अन्य पदार्थ बनती है जिनका उपयोग वृक्षों की वृद्धि और जनन में होता है. साथ ही बाहर निकली ऑक्सीजन प्राणीसमूह द्वारा श्वसन में उपयोग की जाती है.

8 जुलाई, 2016

वन संरक्षण (Conservation of Forest)

जीवंत वन संसाधनों के संरक्षणों के अंश आवश्यक रूप में वन पारितंत्र की सुरक्षा जिसके तीन उद्द्येश्य हैं:-

  1. वांछनीय पारिस्थितिक कार्य-कलापों और जीवन तंत्रों जैसे मृदा पुनर्जनन एवं सुरक्षा पोषक तत्वों का पुनः चक्रण, एवं जल संसाधनों की स्वच्छता बनाए रखना , जिन पर मानव की उत्तरजीविता एवं विकास निर्भर  करता है.
  2. प्रजातियों एवं पारितंत्रों का मात्र उचित समा तक सतत उपयोग , जिन पर समस्त विश्व का अधिकाँश ग्रामीण समुदाय और कई उद्योग निर्भर हैं.
  3. आनुवांशिक विविधता का अनुरक्षण जिस पर कृषित पादपों एवं पालतू पशुओं का संकरण कार्यक्रम आधारित है, ताकि उनकी निरंतर सुरक्षा और उन्नति (सुधार) होती रहे.

9 जुलाई, 2016

वन संसाधन मूल्यांकन पद्धति (Forest Resources Assessment Process)

प्राकृतिक जनसंख्याओं में स्थैतिक स्व सह-सम्बन्ध एवं  स्थैतिक विविधता कि विशिष्टताएं होती है, जो वन- संसाधनों के मामले में तो और भी अधिक सामने आती है. अतः प्रभाग जैसे किसी बड़ेवन संसाधन क्षेत्र के आकलन के लिए, व्यवस्थित प्र-न्यादर्ष चयन (sampling), जनसँख्या मानकों (parameters) का सर्वथा यथार्थ  अनुमान प्रस्तुत करता है.

वन सम्पदा आकलन के लिए विभिन्न मापदंडों हेतु इष्टतम क्षेत्र (क्षेत्र न्यादर्ष) के खंदकों का चयन करबे की आवश्यकता होती है. भण्डार (वनधन) वृद्धि के आकलन हेतु आयतन अथवा संख्या के लिए 0.1 हेक्टेयर का खण्डक इष्टतम होता है. इसी प्रकार, पुनर्जनन  के मूल्याकन की स्थिति कि दृष्टि से 2×2 मी  अथवा 3×3 मी के खण्डक इष्टतम है. मृदा जैविक कार्बन के मूल्याङ्कन के लिए  30x30x30 सेमी का एक 3 आयामी भूखंडक (गड्ढा) सर्वथा उपयुक्त होता है. वृक्षों, झाड़ियों, एवं शाकों के पारिस्थितिक अध्ययन  केलिए क्रमश: 10×10 मी, 3×3 मी,  एवं  1×1मी माप के खण्डक सर्वथा उपयुक्त होते हैं.

10 जुलाई, 2016

Abandoned: परित्यक्त अर्थात छोड़ दिया गया अथवा त्याग दिया गया. जैसे परित्यक्त वन क्षेत्र, रेंज आदि